एक लड़की
सोच रहीं हु कि क्या लिखु । शायद कोई कहानी लिख दु, पर उसे पढ़ेगा कोन? बहुत सारे सवाल है दिमाग मै पर मुझे अपने मन की करनी है। उस मन की जिसे आज़ाद रहना पसंद है, ना कि इस दुनिया क़े पिंजारो मै कैद रहना।
मैं जानती हूँ। यहा हरकोई अपने मन की करना चाहता है, पर.....
पर क्या? आपकी ही जिंदगी है ना? या फिर किसी और कि, अरे यार फिर सोच मैं पड़ गए। ऐसे केसे तुम अपनी मंजिल से मिल पाओगे। सुनो यहा लोगों को नीचा गिराने का बहुत सोख हैं।
यै तुम्हे अपने मन की नहीं करने देंगे मगर तुम हिम्मत मत हारना । तुम वही करना जो तुम्हे अच्छा लगे। चलो एक लड़की की कहानी बताती हु । हा उसीकी जिसे खुले आसमान में उड़ना बहुत पसंद था।
एक सपना लडकी का
देखो भाई ये बात तो सब जानते है कि यहां पर हर किसीको हक है अपनी जिंगदी अपने उसूलों पे जीनेका । उसी तरह एक गाँव की लड़की थी । जो बहुत बड़े ख़्वाब देखती थी । वह चाहती थी कि उसके सपने भी पूरे हो वह भी एक दिन सपनो की उड़ान भर ।
उसका सपना क्या था पता है आपको , airforce मैं जाना , दुनिया घूमना और अपनी जिंगदी को एक सही राह देना । वो तो अपने साथ अपने गाँव के लिए भी सपने देखती थी । कि एक दिन बहुत बड़ी इंसान बनेगी और अपने गाँव मे तरक्की करवाएगी । पर...........
हमारा प्यारा समाज
" समाज " इसे तो जानते ही होंगे आप लोग । यह वह समाज है जो आपको सही या गलत दोनो बातो पे टोकेगा , और आपकी तरक्की तो इससे देखी नही जाएगी ।
चलिये उस लड़की की बात पर आते है जीसकी उड़ान भी ऐसे ही एक समाज ने रोकी थी ।
उस वक्त समाज मे ये प्रतिबंध था कि कोई भी लड़की बाहर जाकर काम नही कर सकती , अगर वो ऐसा कुछ करेगी तो उसे उसके परिवार के साथ समाज से बाहर कर दिया जाएगा ।
ये बात जानते हुए भी मुकता के पापा ने अपनी बेटी के सपनो की बात समाज के सामने रखी । पर ये कमबख्त समाज ने उस बाप के संस्कारों पे बात ढोलदी । की उसकी बेटी को ऐसे संस्कार न दे वरना वह कुछ गलत करेगी और हमारे समाज का नाम दुबौगी और उसके ज़िम्मेदार तुम होंगे ।
आप ही बताओ अब वो लाचार बाप क्या करता । उसकी लाख समजाने के बाद भी समाज और लोगो ने उसकी एक न सुनी और उसे अपनी बेटी की सादी करने के लिए कहा ।
( सादी .....अभी तक तो वो सिर्फ 19 साल की बच्ची है अभी तो उसे अपनी उड़ान भरनी है । अपना नाम इस दुनिया के सुनहरे पन्नो में लिखवाना है । पर........ )
मुकता के पापा का फैसला
मुकता की माँ ने भी समाज की बात में हा भरी और कहा कि अगर बेटी को बाहर भेजा और उसने कुछ गलत किया तो जिम्मेदार हम होंगे और समाज से बाहर होंगे वो अलग से । मुकता के पापा को तो अपनी बेटी के सपने पूरे करने थे । वह क्यू समाज की फिक्र करता पर.....
उनके एक फैसले ने मुकता की ज़िंदगी बदल दी ।
वह रात भर सोये नही , और सोचते रहे कि आखिर उनकी बेटी को सपने देखने का हक नही है?
क्या सिर्फ लड़के ही सपने देखब सकते है और उसे पूरा कर सकते है?
क्या लड़की को इस खोखले समाज मे कोई हक नही?
इन सारे सवालों का जवाब किसी के पास नही था । शायद आपके पास ही नही होगा । और होगा भी कैसे सबको अपना समाज प्यारा है और उसमें टिके रहना । सही कहा ना मैने ?
अगर इस समाज से मुकता पापा को भी प्यार ना होता तो शायद आज मुकता भी अपनी उड़ान भर चुकी होती । जी हाँ , मुकता के पापा ने अपनी बेटी के सपनो को दबा दिया ये सोचकर की समाज उन्हें और उनकी बेटी को सन्मान नही देगा और उन्हें बाहर निकल देगा ।
डर गया वो बाप । आखिर करता भी क्या वो ? बेबस था , प्यारे समाज के सामने । और उसकी इस बेबसी ने उसकी बेटी के सपनो को चूर चूर कर दिया ।
मुकता की सादी
मुकता के पापा ने मुकता के लिए तुरंत रिस्ते देखना शुरू कर दिया । और देखते ही देखते एक अच्छे घर से रिश्ता आया । लड़का पढालिखा था । नोकरी के तलाश में ही था । मुकता के पापा को ये लड़का बड़ा पसंद आया ।
क्या मुकता को पता थी ये बात ?
क्या उसकी राय थी सादी करने की बात में ?
जवाब : नही । जी हाँ मुकता को जरा सी भी खबर नहीं थी कि उसके पापा उसके लिए रिस्ता ढूंढ रहे है । उस बिचारी को तो यह तक नही पता था कि उसका नसीब समाज तय कर चुकी है ।
मुकता की शादी की खबर उसे शादी के ठीक दो दिन पहले हुई। वह पूरी तरह से टूट चुकी थी ।
उसकी सपनो का क्या ?
उसकी उड़ान ?
उसकी जिंदगी ?
उसका भविष्य ?
बहुत सारे सवाल थे पर ..... जवाब किसी भी सवाल का नही था ।
मुकता का फैसला
मुकता एक ऐसी लड़की थी जिसे अपने पापा ने पूरी आजादी दी थी अपनी जिंगदी जीने की और अपने सपनो को पूरा करने की पर... अचानक से उसके पापा के इस व्यवहार ने उसे तोड़ दिया ।
एक बार तो उसने घर भाग जाने का फैसला किया । पर अपने पापा के सामने वह हार गई । आखिर में उसने इस शादी के लिये हा करदी । दो दिन बाद उसकी शादी की गई , उसके पापा बहुत खुश थे क्योंकि लड़का अच्छे घर से था और समाज भी खुश था क्योंकि लड़की ने अपनी उड़ान को छोड़के शादी को चुना ।
लेकिन मुकता के चहरे पे जरा सी भी खुशी नही दिख रही थी । और कैसे वह बिचारी खुश होती उसके सपने को तो कुचला गया था । और वो भी उसके अपने पापा और प्यारे समाज ने , उस गांव ने जिसके लिए उसकी तरक्की के उसने सपने देखे थे ।
आख़िर किसकी गलती
शादी करके मुकता की बिदाई हुई । उसके मा और पापा अब अकेले हो चुके थे क्योंकि उनकी एकलौती बेटी थी और वह भी ससुराल चली गई । मुकता अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश होने के बजाय जब से गई तबसे रो रही थी । उसके पति ने उसे समजाया और प्यार से उसके आंसू पोछे । पहले तो उसे लगा कि चलो अच्छे इंसान से शादी हुई पर.......
उसकी खुशी सिर्फ दो-तीन महीने तक ही थी । फिर उसकी खुशियों को किसी की नजर लग गई । ( पर इस बार समाज की नजर नही थी । )
उसका पति एक रात शराब के नशे में घर पर आया । बहुत शराब पी हुई थी उसने , जोर जोर से दरवाजा खटखटाने लग गया । मुकता ने जैसे ही दरवाजा खोला सामने देखा तो नशे की हालात में फटे हुए कपड़ो में एक आदमी खड़ा था । पहले तो मुकता उसे पहचान न पाई पर आवाज से पता चला कि उसका पति है ।
जैसे ही वह कुछ पूछती उसने मुकता को मारना शुरू कर दिया , और शराब के नशे में कुछ बाते बोल रहा था । कि उससे शादी करना उसके लिए ज़िन्दगी का खराब फैसला था , उसने उसकी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी । मुकता कुछ बोले बिना उसकी मार खाती रही और सारी रात रोइ । जब सुबह हुई तो उसने अपने पति से बात करने की कोसिस की पर वह कुछ भी सुने बिना चला गया ।
अब तो वह मुकता से बात भी नही करता था । मुकता हर दिन रो कर गुजारती थी । उसका पति रोज पी कर आता और रोज उसे मारता । ये सब कुछ छे महीनों तक चला और फिर एक दिन मुकता ने अपने घर जाकर सब कुछ बताने का फैसला किया ।
लेकिन आधे रास्ते से ही उस्का लाती उसे वापस ले आया । और घर लाकर उसे बहुत मारा । वह अब मुकता को बांध के रखता था , उसे खाने के लिए भी नही देता था ।
मुकता के दिमाग मे सिर्फ एक ही बात थी की उसकी गलती क्या है ?
उसके पति को बिचारि पे जरा सी भी दया नही आती थी । अब तो वह ज्यादा पिने लग गया था ।
एक दिन फिरसे मुकता ने भाग ने की कोशीश की और इस बार वह कामयाब हुई । वह अपने माँबाप के पास गई और उन्हें सारी बात बताई । उसके माँ ने उसे कपड़े दिए पहनने को और उसे समजाया की लड़कियों को सहन करना पड़ता है । इस बार फिरसे उसके पापा चुप थे ।
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